☀️ “पहली सुबह — नई ज़िंदगी की शुरुआत”

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सूरज की पहली किरण खिड़की से झाँक रही थी।

सुनहरी रोशनी ने कमरे को हल्के गुलाबी रंग में रंग दिया था।

आर्या की आँखें धीरे-धीरे खुलीं — उसके पास आरव था, अब उसका पति, अब उसकी पूरी दुनिया।


कमरे में अब भी फूलों की महक थी, और हवा में एक सुकून-सा जादू।

आर्या ने धीरे से उठकर पानी का गिलास उठाया —

माथे का सिंदूर हल्का-सा झिलमिला रहा था, और उसकी मुस्कान में एक नयी चमक थी।


आरव ने आँखें खोलीं,


> “इतनी सुबह उठ गईं मेरी मिसेज़ शर्मा?”

उसने हँसते हुए कहा।




आर्या ने प्यारी सी मुस्कान दी,


> “अब घर भी तो हमारा है… ज़िम्मेदारी भी हमारी।”




आरव ने उसका हाथ थामा,


> “बस इतना वादा करो, ज़िंदगी भर ऐसे ही मुस्कुराती रहना।”




आर्या ने सिर झुकाया और बोली —


> “अगर तुम ऐसे ही साथ रहो, तो मुस्कुराना कभी बंद नहीं होगा।”




उस पल दोनों ने महसूस किया —

शादी सिर्फ एक रिश्ता नहीं,

एक नया जन्म है, जहाँ दो ज़िंदगियाँ एक धड़कन में बंध जाती हैं।


बाहर पक्षियों की चहचहाहट थी,

और अंदर एक नई सुबह — हमेशा साथ रहने की कसमें और प्यार की मीठी शुरुआत।



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