“वो शाम जब बारिश लौटी”
🌦️ एक गलतफ़हमी की शुरुआत
सर्दियों के बाद वक़्त थोड़ा बदल चुका था।
आरव को ऑफिस में नई ज़िम्मेदारियाँ मिल चुकी थीं,
और माया का प्रमोशन भी हुआ था।
अब दोनों की ज़िंदगी में कम वक्त और ज़्यादा काम था।
कॉल्स कम होने लगीं,
कॉफी डेट्स बीच-बीच में रुक गईं।
एक दिन माया ने मैसेज किया —
> “आरव, तुम अब पहले जैसे नहीं रहे…”
आरव जवाब देना चाहता था,
पर मीटिंग चल रही थी।
और वही एक अनकहा पल
उनके बीच पहली दूरी बन गया।
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💔 बरसात की वो शाम
तीन दिन बाद, कैफ़े के बाहर बारिश थी —
वही जगह जहाँ उनकी पहली मुलाकात हुई थी।
माया अकेली आई थी,
हाथ में पुराना कॉफी मग —
वही, जिस पर लिखा था I Love You. ☕
वो सोच रही थी,
> “क्या प्यार भी वक्त के साथ फीका पड़ जाता है?”
तभी पीछे से आवाज़ आई —
> “अगर कॉफी ठंडी हो जाए,
तो मतलब ये नहीं कि उसका स्वाद खत्म हो गया…”
वो आरव था —
भिगा हुआ, लेकिन मुस्कुराता हुआ। ☔
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💞 इकरार दोबारा
आरव ने उसके सामने कप रखा,
> “आज मैंने तुम्हारी पसंद की कॉफी बनाई है —
वही स्ट्रॉन्ग, बिना शक्कर वाली।
क्योंकि मीठा अब हमारे रिश्ते में है।”
माया की आँखें नम हो गईं।
> “मुझे लगा, तुम भूल गए हो…”
आरव ने उसका हाथ थामा —
> “मैं कैसे भूल जाऊँ वो लड़की,
जिसने मुझे प्यार सिखाया?”
बारिश रुक गई थी,
पर उनकी बातें अब दिलों की बारिश बन चुकी थीं। 🌧️💓
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🌙 उस रात के बाद
दोनों फिर से उसी रूटीन में लौट आए —
लेकिन अब हर “कॉफी डेट”
एक छोटा सा जश्न लगने लगी।
माया ने कहा,
> “प्यार को ज़्यादा बातों की नहीं,
थोड़ा भरोसे की ज़रूरत होती है।”
आरव ने मुस्कुराकर जवाब दिया,
> “और थोड़ी कॉफी की भी।” ☕😉
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✨ End Note:
> “कभी-कभी रिश्ते टूटते नहीं,
बस थक जाते हैं…
और जब बारिश आती है,
तो वही रिश्ता फिर से खिल उठता है।” ❤️🌧️
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