“पहली सर्दी, पहला साथ”
💞
🌆 सर्द हवाओं में महकता रिश्ता
दिल्ली की ठंडी सर्दियाँ शुरू हो चुकी थीं।
कैफ़े के बाहर धुंध थी,
अंदर कॉफी की गर्म खुशबू और दो दिलों की धड़कनें।
माया ने अपने स्वेटर में खुद को समेटा हुआ था,
और आरव बोला —
> “लगता है सर्दी को भी तुमसे जलन हो रही है…
तभी तो और ठंडी हो रही है।” 😄
माया मुस्कुराई —
> “तुम्हारी बातों से ही तो गर्मी मिलती है।”
दोनों हँस पड़े।
वो छोटी-सी टेबल अब उनकी दुनिया बन चुकी थी।
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🔥 पहली शाम, पहली छुअन का एहसास
उस दिन माया ने कहा,
> “आरव, मुझे आज देर हो जाएगी… क्या छोड़ दोगे घर तक?”
आरव बोला,
> “तुम्हारे साथ चलना तो मेरी सबसे प्यारी मंज़िल है।”
रास्ते में हल्की-हल्की ठंड और उनके बीच खामोश मुस्कानें थीं।
माया की उंगलियाँ ठंडी थीं,
आरव ने हल्के से उसका हाथ पकड़ लिया।
एक पल को दोनों थम गए।
ना कुछ कहा, ना कुछ सुना —
बस हवा में एक अनकहा एहसास घुल गया। 💞
माया ने धीरे से कहा,
> “तुम्हारे हाथ इतने गर्म क्यों हैं?”
आरव मुस्कुराया,
> “क्योंकि मेरा दिल तुम्हें देखकर हर वक्त जलता रहता है…” ❤️
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🌙 एक कप कॉफी, एक लंबी रात
माया ने उसे घर के बाहर कॉफी ऑफर की।
> “चलो, आज मैं बनाती हूँ — घर की कॉफी।”
आरव बोला,
> “अगर कॉफी तुम्हारे हाथ की है, तो मीठी ज़रूर होगी।”
वो दोनों बालकनी में बैठे —
नीचे सर्दी की हवा, ऊपर तारों का आसमान।
माया ने कहा,
> “कभी डर लगता है… कहीं ये सपना न हो?”
आरव ने उसकी आँखों में झाँका —
> “अगर ये सपना है, तो मैं कभी जागना नहीं चाहता।”
माया ने मुस्कुराकर कप नीचे रखा,
और बस उतना ही कहा,
> “तो फिर ये सर्दी अब हमारी है।”
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✨ End Note:
> “कुछ मौसम रिश्ते बदल देते हैं,
और कुछ रिश्ते मौसम को —
जैसे सर्दी अब ठंडी नहीं लगती,
क्योंकि किसी की मौजूदगी ने उसे गर्म कर दिया है…” ❄️❤️
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